केंद्र और राजस्थान की किसान योजनाएं: आसान सूची, कौन सी योजना किस काम की है
हर योजना अलग पोर्टल पर होती है, इसलिए किसान चक्कर काटते हैं। यह पन्ना बताता है कि कौन सी योजना पैसे देती है, कौन सी बीज, कौन सी बिजली, और कहां पूछना है।
हर योजना अलग पोर्टल पर होती है, इसलिए किसान चक्कर काटते हैं। यह पन्ना बताता है कि कौन सी योजना पैसे देती है, कौन सी बीज, कौन सी बिजली, और कहां पूछना है।
आगे यूरिया-डीएपी की बुकिंग और कई योजनाओं का लाभ Farmer ID के बिना अटक सकता है। सितंबर 2026 का विशेष अभियान 30 तारीख को बंद हो रहा है।
घरेलू मुफ्त बिजली और खेत के कनेक्शन की सब्सिडी एक चीज़ नहीं है। यह योजना सिर्फ मीटर लगे कृषि कनेक्शन के बिल में ₹1,000 महीने तक का सहारा देती है।
पहले इसका नाम राजीव गांधी कृषक साथी सहायता योजना था। 2024 में नाम बदला और कुछ चोटों की रकम बढ़ाई गई। मृत्यु पर मदद ₹2 लाख तक है। दावा मंडी समिति में बनता है।
बाजार का बीज महंगा और कई बार भरोसे लायक नहीं होता। यह योजना किसानों को अपना बीज खुद पैदा करने और चुनिंदा फसलों पर भारी अनुदान के लिए है।
डीज़ल पंप की जगह सोलर पंप का असली खर्च समझिए। केंद्र 30 प्रतिशत देता है, राज्य को कम से कम 30 प्रतिशत देना होता है। घोषित अवधि 31 मार्च 2026 को पूरी हो चुकी है।
हर साल एक जैसी डीएपी डालना मिट्टी को थका देता है। कार्ड बताता है कि इस खेत को असल में कौन सी खाद चाहिए। जांच सरकारी प्रयोगशाला में होती है।
बोरी पर छपा दाम ही असली दाम है। यूरिया नियंत्रण में है, डीएपी पर पोषक तत्व सब्सिडी है। ज्यादा पैसे मांगने वाले दुकानदार का बिल जरूर लें।
एक अच्छी तलाई रबी की पहली सिंचाई बचा लेती है। छोटे किसानों को कच्ची तलाई पर 70 प्रतिशत तक और नहर की डिग्गी पर 85 प्रतिशत तक अनुदान का ढांचा दर्ज है।
दस-बीस किसान मिलकर एक संस्था बनाएं तो बीज, खाद और मंडी में मोलभाव बदल जाता है। सरकार इक्विटी GRANT और कर्ज की गारंटी देती है। कंपनी का मुनाफा अपने आप नहीं आ जाता।
पूरा ट्रैक्टर मुफ्त देने वाली कोई आम योजना नहीं है। सीड ड्रिल, थ्रेसर, स्प्रेयर और रोटावेटर पर अनुदान मिलता है, प्रतिशत किसान की श्रेणी और मशीन पर निर्भर करता है।
मरुधरा किसान
राजस्थान और बीकानेर के किसानों के लिए सरल, भरोसेमंद और काम की हिंदी जानकारी।
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