यूरिया और डीएपी पर सब्सिडी: किसान सस्ता क्यों पाता है, और कालाबाज़ार से कैसे बचें

राजस्थान के खेत में ड्रिप सिंचाई और पौधा
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खाद की कतार में सबसे ज्यादा गुस्सा यूरिया को लेकर होता है। किसान को लगता है दुकानदार मनचाहे दाम लगा रहा है। असल में यूरिया का दाम सरकार तय करती है, क्योंकि इस पर भारी सब्सिडी है। डीएपी और दूसरी मिश्रित खाद पर व्यवस्था थोड़ी अलग है। उसे पोषक तत्व आधारित सब्सिडी कहते हैं।

दो सब्सिडी, दो तरीके

यूरिया। पूरी तरह नियंत्रण में। 45 किलो की नीम कोटेड बोरी किसान को लगभग ₹266 से ₹276 में मिलनी चाहिए। कारखाने को कच्चा माल महंगा पड़े या सस्ता, आपके दाम लगभग वहीं रहते हैं। बोरी पर नीम का लेप इसलिए है कि यह खाद उद्योग में न बहे और धीरे-धीरे घुले।

डीएपी, एनपीके, एमओपी, एसएसपी। इनका दाम यूरिया जितना कड़ा नहीं, पर केंद्र हर सीजन पोषक तत्व पर सब्सिडी तय करता है ताकि बोरी सहने लायक दाम पर रहे। खरीफ 2026 (1 अप्रैल से 30 सितंबर) के लिए इस सब्सिडी का बजट करीब ₹41,534 करोड़ रखा गया। डीएपी की 50 किलो बोरी लंबे अरसे से ₹1,350 के आसपास है। एमओपी करीब ₹1,670 और आम एनपीके करीब ₹1,470 बताई जाती रही है। बिल पर छपा दाम ही मानें।

सब्सिडी आपके खाते में नहीं आती। वह कंपनी और आयातक को मिलती है। जो व्यक्ति “खाद सब्सिडी की किस्त” आपके आधार पर दिलाने के पैसे मांगे, वह झूठ बोल रहा है।

राजस्थान में स्टॉक

कृषि विभाग के मुताबिक अप्रैल से अगस्त 2026 में केंद्र ने राजस्थान को 9.28 लाख मीट्रिक टन यूरिया आवंटित किया। सितंबर के मध्य तक प्रदेश में यूरिया और डीएपी दोनों का स्टॉक बताया गया। फिर भी स्थानीय दुकान पर लाइन लग जाती है, क्योंकि रबी की बुवाई एक साथ शुरू होती है। स्टॉक की कमी और दाम की लूट अलग बात है। लूट का इलाज बिल और शिकायत है।

विभाग यूरिया-डीएपी की बुकिंग को गैस सिलेंडर जैसी व्यवस्था की तरफ ले जा रहा है, ज़मीन और फसल के हिसाब से। इसीलिए Farmer ID इस माह बनवाना उपयोगी है।

दुकान पर क्या देखें

  • बोरी पर अधिकतम खुदरा मूल्य छपा हो
  • बैग फटा हो या दोबारा सिला हो तो न लें। वजन कम निकलता है
  • बिल पर तारीख, बोरी संख्या और रकम लिखवाएं
  • तय दाम से ज्यादा मांगे तो उपभोक्ता हेल्पलाइन 181 या ज़िला कृषि कार्यालय में बिल के साथ शिकायत करें
  • एक साथ जरूरत से बहुत ज्यादा यूरिया घर में रखना भी ठीक नहीं। नमी से वजन और ताकत दोनों घटते हैं

मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड देखकर खाद खरीदें। सस्ती यूरिया भी गलत मात्रा में महंगी पड़ती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यूरिया की बोरी का सही दाम क्या है?

45 किलो नीम कोटेड यूरिया का खुदरा दाम सरकार के नियंत्रण में है और लंबे समय से ₹266 से ₹276 के आसपास रहा है, जिसमें टैक्स और बैग शामिल होते हैं। दुकान पर इससे काफी ज्यादा मांगे जाएं तो बिल लेकर कृषि या विपणन निरीक्षक को बताएं।

डीएपी पर सब्सिडी किसे मिलती है, किसान को या कंपनी को?

सब्सिडी कंपनी को मिलती है, ताकि बोरी किसान को नियंत्रित दाम पर बेची जाए। किसान के खाते में अलग से डीएपी की किस्त नहीं आती। 50 किलो डीएपी लंबे समय से ₹1,350 के आसपास बिकी है।

बिना Farmer ID खाद मिलेगी?

अभी दुकान से बिक रही है। विभाग ज़मीन और फसल के हिसाब से बुकिंग की तरफ बढ़ रहा है। पहचान बनवा लेने से आगे कोटा काटने में आसानी रहेगी।

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