किसान भाइयों, सरसों की बंपर पैदावार के लिए सही समय, बीज उपचार और वैज्ञानिक तरीका अपनाना बहुत जरूरी है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप चौधरी से जानें सरसों की खेती के सबसे जरूरी सूत्र।
(पूरी और विस्तृत जानकारी के लिए नीचे दिया गया वीडियो जरूर देखें!)
सरसों की उन्नत खेती
सरसों की खेती की मुख्य बातें:
- बुवाई का सही समय: 15 अक्टूबर से 25 नवंबर। ध्यान रहे, बुवाई तभी करें जब दिन का तापमान 30°C से नीचे आ जाए।
- मिट्टी व उन्नत किस्में: हल्की क्षारीय बालू मिट्टी (pH 7-8) सबसे अच्छी है। पूसा 21, पूसा जय किसान, कस्तूरी और गोमती जैसी किस्मों का चुनाव करें।
- बीज की मात्रा व बुवाई: 1 किलो बीज प्रति एकड़ पर्याप्त है। हमेशा कतारों में बुवाई करें (लाइन से लाइन की दूरी 1.5 फीट और गहराई 2-5 सेमी रखें)।
- बीज उपचार (सबसे जरूरी): फंगस से बचाव के लिए बुवाई से पहले बीज को मैन्कोजेब या ‘ट्राइकोडर्मा’ से जरूर उपचारित करें।
- खाद व उर्वरक: खेत में सड़ी हुई गोबर खाद और बायो-डिकम्पोजर डालें। बुवाई के समय 20-25 किलो SSP और 2-3 किलो बेंटोनाइट सल्फर (माइकोराइजा के साथ) दें। यूरिया का अंधाधुंध इस्तेमाल न करें।
- सिंचाई प्रबंधन: पहला पानी 30-40 दिन और दूसरा पानी 60-70 दिन पर दें। दिसंबर-जनवरी की भयंकर सर्दी में पाले से बचाव के लिए सल्फर का स्प्रे जरूर करें।
प्रमुख रोग, कीट और उनका नियंत्रण:
- सफेद रतुआ, झुलसा और तना गलन (फंगस रोग): पत्तियों पर धब्बे या तना गलने पर तुरंत फंजीसाइड या ट्राइकोडर्मा का स्प्रे करें।
- चेपा / माहू (Aphid): अत्यधिक सर्दी में यह कीट पौधे पर चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है। इसके लिए कीटनाशक और फंजीसाइड दोनों को मिलाकर स्प्रे करें।
- ओरोबेंकी (स्थानीय भाषा में ‘फोड़’): जड़ों में उगने वाले इस परजीवी से बचने के लिए खेत में पकी हुई खाद डालें। जिन खेतों में यह समस्या ज्यादा है, वहां पीली सरसों की बुवाई करें।
फसल से जुड़ी किसी भी विशेष समस्या या सलाह के लिए आप डॉ. प्रदीप चौधरी से सीधे सुबह 11:00 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच संपर्क कर सकते हैं। खेती-किसानी की ताजा और सटीक जानकारियों के लिए रोजाना विजिट करें KrishiLive.com।
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