रेगिस्तान में डीज़ल और कृषि बिजली दोनों महंगे पड़ते हैं। पीएम कुसुम योजना सोलर से सिंचाई और किसानों की ज़मीन पर छोटे सोलर प्लांट के लिए बनी थी। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक इसमें तीन घटक हैं। किसान के सबसे काम का हिस्सा घटक-बी है: खेत पर अलग खड़ा सोलर पंप।
योजना की घोषित अवधि 31 मार्च 2026 तक थी। आज वह तारीख निकल चुकी है। कई राज्यों में लगे पंपों का काम और बची किस्तें अभी भी चल रही हैं, और अगले चरण की बात चलती रहती है। नया पंप लगवाने से पहले यह मत मानिए कि पुराना विज्ञापन आज भी खुला है।
अनुदान का ढांचा
मंत्रालय का नियम घटक-बी के लिए यह रहा है:
| हिस्सा | कितना |
|---|---|
| केंद्र की सहायता | बेंचमार्क या टेंडर लागत, जो कम हो, उसका 30 प्रतिशत |
| राज्य | कम से कम 30 प्रतिशत |
| किसान | शेष, अधिकतम 40 प्रतिशत |
किसान अपना 40 प्रतिशत भी पूरा नकद न दे। नियम कहता है कि बैंक से कर्ज लेकर शुरुआत में करीब 10 प्रतिशत नकद और बाकी 30 प्रतिशत कर्ज के रूप में रखा जा सकता है। पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में केंद्र का हिस्सा 50 प्रतिशत है। राजस्थान उस सूची में नहीं है।
पंप की क्षमता आमतौर पर साढ़े सात हॉर्सपावर तक रही है। तीन हॉर्सपावर छोटे कुएं के लिए, पांच हॉर्सपावर आम ट्यूबवेल के लिए। सटीक कीमत टेंडर से तय होती है, दुकान के बोर्ड से नहीं।
तीन घटक, गड़बड़ न करें
- घटक-ए: आधा मेगावाट से 2 मेगावाट का प्लांट, ज़मीन किसान या पंचायत या एफपीओ की। बिजली बेचकर आय। अकेले छोटे किसान का पंप यह नहीं है
- घटक-बी: नया सोलर पंप, जहां ग्रिड नहीं है या डीज़ल चल रहा है
- घटक-सी: जो मोटर पहले से बिजली की लाइन पर है, उस फीडर या उस पंप को सोलर करना
बीकानेर में बहुत से किसान घटक-बी पूछते हैं क्योंकि डीज़ल का खर्च रबी में बढ़ जाता है। जिसके पास जेडीवीवीएनएल का कृषि कनेक्शन पहले से है, उसके लिए घटक-सी अलग सवाल है।
अभी क्या करें
- ज़िला नवीकरणीय ऊर्जा कार्यालय या डिस्कॉम से लिखित में पूछें कि राजस्थान में नई लॉटरी या आवेदन खुला है या नहीं
- खुला हो तो ही आधार, ज़मीन, बैंक और मौजूदा पंप का ब्योरा दें
- कोटेशन विभाग के पैनल वाले विक्रेता का लें। बाहर के “कंपनी एजेंट” को एडवांस न दें
- इंस्टॉलेशन के बाद प्लेटों की वाट क्षमता और पंप की एचपी वारंटी कार्ड पर चेक करें
- ड्रिप-स्प्रिंकलर अनुदान अलग योजना है। सोलर पंप लग जाए तो पानी की लाइन पर भी अनुदान पूछ लें
“केंद्र की योजना बंद होने वाली है, आज ही ₹20,000 एडवांस दो” — यह सबसे आम ठगी है। जब तक विभाग की रसीद न हो, पैसे न दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सितंबर 2026 में नया आवेदन भर सकते हैं?
केंद्र की घोषित मियाद 31 मार्च 2026 तक थी। उसके बाद नई खिड़की राज्य नवीकरणीय ऊर्जा विभाग या डिस्कॉम ही बता सकता है। पैसे जमा कराने वाले एजेंट पर भरोसा न करें।
किसान को कुल खर्च का कितना प्रतिशत देना पड़ता है?
नियम के मुताबिक केंद्र 30 प्रतिशत, राज्य कम से कम 30 प्रतिशत, और किसान का हिस्सा अधिकतम 40 प्रतिशत। बैंक कर्ज मिल जाए तो नकद में कई किसानों को करीब 10 प्रतिशत ही देना पड़ता है। राजस्थान अपनी खिड़की में हिस्सा और घटा भी सकता है। लिखित कोटेशन विभाग से लें।
कौन सा पंप आता है?
घटक-बी अलग खड़ा सोलर पंप है, आम तौर पर 7.5 हॉर्सपावर तक। घटक-सी पहले से लगी ग्रिड वाली मोटर पर सोलर प्लेट लगाने के लिए है। दोनों के कागज़ अलग हैं।

