अगस्त की बारिश एक हफ्ते में बह जाती है और अक्टूबर में मोटर के भरोसे रबी बोनी पड़ती है। खेत तलाई उसी पानी को रोकती है। जहां इंदिरा गांधी नहर की पाली आती है, वहां डिग्गी बारीश के साथ नहर का पानी भी संभालती है, ताकि वारी के दिन मोटर न जलानी पड़े।
नाबार्ड की जनवरी 2026 की राज्य रिपोर्ट में राजस्थान सरकार के अनुदान का यह ढांचा दर्ज है। आदेश बदल सकते हैं। खुदाई से पहले कृषि या जल संसाधन कार्यालय की ताज़ा सीमा ले लें।
कितना अनुदान
| काम | छोटे, सीमांत, अनुसूचित जाति और जनजाति | बाकी किसान |
|---|---|---|
| कच्ची खेत तलाई | 70 प्रतिशत या ₹73,500 तक | 60 प्रतिशत या ₹63,000 तक |
| प्लास्टिक लाइन वाली तलाई | 90 प्रतिशत या ₹1,35,000 तक | 80 प्रतिशत या ₹1,20,000 तक |
| नहर क्षेत्र में डिग्गी | 85 प्रतिशत या ₹3,40,000 तक | 75 प्रतिशत या ₹3,00,000 तक |
| तारबंदी | 60 प्रतिशत या ₹48,000 तक | 50 प्रतिशत या ₹40,000 तक |
| पाइप से पानी लाना | 60 प्रतिशत या ₹18,000 तक | 50 प्रतिशत या ₹15,000 तक |
सामूहिक तारबंदी पर रिपोर्ट में 70 प्रतिशत या ₹56,000 तक का जिक्र है। तारबंदी अकेले डिग्गी की योजना नहीं है, पर नीलगाय और आवारा पशुओं वाले खेत में साथ पूछी जाती है।
कहां कौन सा गड्ढा बने
- बारानी खेत, जहां भरण-पोषण बारिश से है: कच्ची तलाई। रेत में पानी जल्दी समाता है, इसलिए प्लास्टिक या चिकनी मिट्टी की परत पूछें
- नमक वाली ज़मीन: प्लास्टिक लाइनिंग ज्यादा काम की
- नहर की पाली वाला खेत: डिग्गी। आकार विभाग के नक्शे से तय होता है। मनमर्जी का विशाल गड्ढा अनुदान से बाहर हो जाता है
ड्रिप और फव्वारा अलग योजना है। उसे इस लेख में पढ़ें। तलाई का पानी ड्रिप से जोड़ना सबसे किफायती जोड़ी है।
आवेदन का क्रम
- खेत का खसरा, आधार, बैंक और जोत का प्रमाण लेकर कृषि कार्यालय जाएं
- जगह का नाप करवाएं। लाइन, सड़क और पड़ोसी कुएं की दूरी के नियम होते हैं
- अनुमति के बाद ही खुदाई शुरू करें। पहले खोदने पर कई दावे कट जाते हैं
- बिल, फोटो और माप समिति की जांच के बाद अनुदान डीबीटी से आता है
- प्लास्टिक शीट की मोटाई बिल में लिखी हो। पतली शीट एक धूप में फट जाती है
अटल भूजल योजना की कुछ पुरानी किस्तें 2025 के बाद अटकी थीं। सितंबर 2026 में राज्य ने वह बकाया आपदा कोष से चुकाने की बात कही है। वह पुराना बकाया है। नई तलाई का आवेदन उसी पोर्टल पर अपने आप पास नहीं माना जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह ड्रिप सब्सिडी वाली योजना है?
नहीं। ड्रिप और स्प्रिंकलर पाइपलाइन की योजना अलग है। तलाई और डिग्गी पानी इकट्ठा करने के गड्ढे हैं। कई किसान दोनों ले सकते हैं।
पैसे पहले खुद लगाने पड़ते हैं?
अक्सर हां। पहले नाप और अनुमति, फिर काम, फिर जांच के बाद अनुदान खाते में। जो एजेंट “पूरी रकम पहले हम देंगे” कहे, उसका कागज़ विभाग से मिलाएं।
बीकानेर में डिग्गी किसके लिए है?
नहर कमांड क्षेत्र में डिग्गी, इंदिरा गांधी नहर की पालियों वाले खेतों के लिए उपयोगी है। शुद्ध बारानी रेत वाले खेत में कच्ची या प्लास्टिक वाली तलाई पूछें।

