खेत में ट्रैक्टर पलटना, थ्रेसर में हाथ आना, या मंडी में बोरी लादते समय गिरना — ऐसे हादसे के बाद परिवार के पास इलाज के पैसे भी नहीं बचते। राजस्थान की मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना इसी मौके के लिए है।
पुराना नाम राजीव गांधी कृषक साथी सहायता योजना था। 2024 में भजनलाल शर्मा सरकार ने नाम बदला और हड्डी की गंभीर चोट तथा कोमा की सहायता राशि बढ़ाई। योजना कृषि विपणन बोर्ड और मंडी समितियों के जरिए चलती है।
मदद कितनी है
छपे नियमों का ढांचा, जिसे दावा करने से पहले मंडी समिति की ताज़ा सूची से मिला लें:
| हालत | सहायता का ढांचा |
|---|---|
| हादसे में मृत्यु | परिवार को ₹2,00,000 तक |
| दो अंगों के बराबर हड्डी की चोट, या सिर की चोट से कोमा | ₹2,00,000 तक (2024 में पहले के ₹50,000 से बढ़ाया गया) |
| एक उंगली का नुकसान | करीब ₹5,000 |
| उम्र | आमतौर पर 14 से 75 वर्ष |
रकम चोट के हिसाब से सीढ़ी जैसी है। बीच की चोटों की राशि ₹5,000 और ₹2,00,000 के बीच आती है। इसलिए अखबार की एक लाइन पर भरोसा करके दावा न छोड़ें। मंडी समिति के नोटिस पर पूरी तालिका छपी होती है।
किसे मिलती है
- किसान
- खेत मज़दूर
- मंडी के हम्माल और पल्लेदार
हादसा खेती के काम या मंडी के काम के दौरान का होना चाहिए। ट्रैक्टर खेत जाते रास्ते में दुर्घटनाग्रस्त हो, तो भी कार्यालय से पूछ लें। कई दावे इसलिए कटते हैं क्योंकि कागज़ में “खेती के काम पर थे” साफ़ नहीं लिखा होता।
दावा कैसे करें
- तुरंत इलाज करवाएं और एमएलसी या अस्पताल की रिपोर्ट लें। मृत्यु हो तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट रखें
- पुलिस की रिपोर्ट, जहां हादसा सड़क या थ्रेसर जैसा हो
- नज़दीकी कृषि उपज मंडी समिति में फॉर्म लें
- मृतक या घायल का पहचान पत्र, उम्र का प्रमाण, वारिस का बैंक खाता
- दो गवाह, जो बता सकें कि व्यक्ति उस समय खेत या मंडी के काम पर था
- जमा करने की रसीद लें। राशि बाद में डीबीटी से खाते में आती है
rajkisan.rajasthan.gov.in पर योजना की जानकारी रखी जाती है। फॉर्म की प्रति मंडी से ही लें, किसी साइबर कैफे के पुराने फोटोकॉपी फॉर्म पर भरोसा न करें।
परिवार ध्यान रखे
हादसे के दिन के कागज़ बाद में नहीं बनते। अस्पताल का पहला पर्ची, थाने की रिपोर्ट और मंडी गेट की एंट्री, जो भी हो, एक लिफाफे में रख दें। दावा जितना जल्दी बने, जांच उतनी आसान रहती है। देरी से इनकार नहीं होता, पर गवाह बिखर जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या हर मौत पर ₹2 लाख मिलते हैं?
योजना खेती या मंडी के काम के दौरान हुए हादसे के लिए है। बीमारी या घर में हुई मौत इसके दायरे में नहीं आती। हादसा साबित करने के कागज़ मंडी समिति जांचती है।
दावा कहां जमा हो?
नज़दीकी कृषि उपज मंडी समिति में। राजकिसान पोर्टल पर जानकारी भी मिलती है, पर दावे के कागज़ मंडी कार्यालय देखता है।
उंगली कटने पर भी मदद है?
हां, चोट के स्तर पर छोटी रकम रखी गई है। एक उंगली के नुकसान पर करीब ₹5,000 का जिक्र नियमों में रहा है। हड्डी की बड़ी चोट और कोमा पर रकम 2024 में बढ़ाई गई। सटीक स्लैब मंडी की ताज़ा शीट से मिलाएं।

