मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड: कौन सी खाद डालें और कौन सी बंद करें, जांच मुफ्त कैसे करवाएं

राजस्थान के खेत में ड्रिप सिंचाई और पौधा
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बीकानेर की रेतीली मिट्टी में एक खेत की जरूरत बगल वाले खेत से अलग होती है। फिर भी दुकान पर जाकर हर किसान लगभग एक जैसी यूरिया और डीएपी उठा लाता है। मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड इसी अनुमान की जगह जांच रखता है। केंद्र की इस योजना में खेत का नमूना प्रयोगशाला जाता है और वापस एक कार्ड मिलता है: कौन सा तत्व कम है, कौन सा काफी है।

कार्ड पर क्या लिखा होता है

  • जैविक कार्बन। रेतीले खेत में यह अक्सर कम होता है। गोबर की खाद, फसल अवशेष और हरी खाद इसी को संभालते हैं
  • नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश। तीनों कम हों तो तीनों खाद जरूरी हैं। एक ज्यादा हो तो उसकी बोरी रोकें
  • पीएच और नमक। इंदिरा गांधी नहर के किनारे कुछ खेतों में नमक बढ़ता है। जिप्सम की सलाह यहीं से आती है
  • सूक्ष्म तत्व, जिंक और लोहा, जहां प्रयोगशाला जांचती हो

कार्ड पर फसल के हिसाब से खाद की मात्रा किलोग्राम प्रति हेक्टेयर में लिखी होती है। एक एकड़ का हिसाब हेक्टेयर का लगभग 0.4 गुना होता है। हिसाब न आए तो कृषि पर्यवेक्षक से एक बार पढ़वा लें। गलत गुणा पूरे सीजन की खाद बढ़ा देता है।

नमूना कैसे दें

  1. फसल कटने के बाद, नई खाद डालने से पहले, नमूना सबसे साफ़ होता है
  2. खेत के चारों कोनों और बीच से मिट्टी लें। ऊपर की घास हटाकर करीब 6 इंच गहराई से
  3. सारी मिट्टी एक साफ़ तसले में मिलाएं। लगभग आधा किलो नमूना काफी है
  4. गीली मिट्टी या खाद के ढेर के बगल की मिट्टी न लें
  5. कृषि पर्यवेक्षक या केवीके को खेत का खसरा नंबर के साथ सौंपें
  6. कार्ड आने में कुछ हफ्ते लगते हैं। नंबर नोट कर लें

soilhealth.dac.gov.in पर पुराना कार्ड देखा जा सकता है, अगर नमूना उसी प्रणाली में दर्ज हुआ हो। नहीं मिला तो स्थानीय प्रयोगशाला का रजिस्टर पूछें। नया नाम ऑनलाइन न होने का मतलब यह नहीं कि जांच हुई ही नहीं।

कार्ड आने के बाद आदत बदलें

जहां फॉस्फोरस “ज्यादा” हो, वहां हर सीजन पूरी डीएपी डालना पैसे और मिट्टी दोनों की बरबादी है। जहां कार्बन कम हो, वहां सिर्फ यूरिया से पौधा हरा तो होता है, ज़मीन कमजोर रहती है। नहर वाले क्षेत्र में जिप्सम की सलाह को टालें नहीं। पानी के साथ नमक फिर ऊपर आ जाता है।

खाद पर मिल रही सरकारी सब्सिडी का लाभ तभी है जब सही बोरी खरीदी जाए। कार्ड के बिना सस्ती खाद भी गलत खाद हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कार्ड बनवाने में पैसे लगते हैं?

सरकारी अभियान में नमूना और जांच किसानों से अलग शुल्क नहीं लेती। कोई निजी प्रयोगशाला पैसे मांग सकती है। कृषि पर्यवेक्षक के हाथ से दिया गया कार्ड ही योजना वाला कार्ड है।

कितने समय बाद दोबारा जांच करवाएं?

आमतौर पर दो से तीन साल में एक बार। बीच में बड़ी मात्रा में जिप्सम या खाद बदली हो तो पर्यवेक्षक से नया नमूना पूछ लें।

कार्ड पर कम और ज्यादा का क्या मतलब है?

कम का मतलब उस तत्व की खाद बढ़ानी है। ज्यादा का मतलब उस खाद को इस सीजन कम करना है। कार्ड की सलाह को बोरी की आदत पर भारी रहने दें।

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