कृषि यंत्रों पर सब्सिडी: ट्रैक्टर नहीं, कौन सी मशीन पर अनुदान मिलता है

राजस्थान के खेत में ड्रिप सिंचाई और पौधा
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मजदूर महंगे हैं और बुवाई के दिन कम। मशीन से एक दिन में उतना काम हो जाता है जितना परिवार हफ्ते में नहीं कर पाता। केंद्र की कृषि यंत्रीकरण योजना और राजस्थान का अपना अनुदान इसी लिए है। बजट 2026-27 में राज्य ने कृषि यंत्रों पर ₹160 करोड़ सब्सिडी का ऐलान किया था, करीब 50,000 किसानों तक पहुंचाने की बात के साथ। ऐलान और आपकी तहसील की खुली सूची एक ही चीज़ नहीं है।

कौन सी मशीनें आमतौर पर आती हैं

  • सीड ड्रिल और सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल। बीज और खाद एक साथ, सही गहराई पर
  • रोटावेटर और कल्टीवेटर
  • थ्रेसर, खासकर मूंगफली और गेहूं
  • स्प्रे पंप, हैंड और पावर दोनों
  • रीपर, जहां फसल काटने की कमी हो
  • ट्रैक्टर चलित छोटे यंत्र। पूरा ट्रैक्टर अलग और कम मौकों पर

प्रतिशत हर अधिसूचना में बदलता है। छोटे और सीमांत किसान, महिला किसान और अनुसूचित जाति या जनजाति को सामान्य किसान से ज्यादा सहायता का रिवाज रहा है। नाबार्ड की राज्य रिपोर्ट भी उपकरण पर 40 से 50 प्रतिशत के बीच की सहायता का जिक्र करती है, हॉर्सपावर के हिसाब से। अपनी मशीन की रुपए सीमा पोर्टल पर पढ़ें। दुकानदार का “50 प्रतिशत” मौखिक वायदा काफी नहीं।

आवेदन का सही क्रम

  1. कृषि विभाग की ताज़ा सूची देखें। राजस्थान एसएसओ या कृषि पोर्टल पर खिड़की खुलती है
  2. Farmer ID, आधार, बैंक, जोत का प्रमाण तैयार रखें
  3. चयन या अनुमति पत्र आने के बाद पैनल की कंपनी से बिल बनाएं
  4. मशीन पर खुदा क्रमांक और इंजन नंबर फोटो में आना चाहिए
  5. भौतिक सत्यापन के बाद अनुदान खाते में आता है। कई जिलों में किसान पहले पूरा पैसा देता है, फिर सब्सिडी लौटती है। नकद का इंतजाम उसी हिसाब से रखें

कस्टम हायरिंग सेंटर की अलग व्यवस्था है। जिसमें स्वयं मशीन न खरीद सके, वह किराये पर विभाग से मान्यता प्राप्त केंद्र पूछ सकता है। गांव में एक केंद्र पूरी ढाणी के काम आ जाता है।

ठगी से बचें

दुकान पर “सरकारी रेट” की लाल पट्टी देखकर एडवांस न दें। पोर्टल पर अपना नाम चयनित हुए बिना बिल अनुदान का बिल नहीं बनता। दो बिल, एक असली और एक बढ़ा हुआ, बनवाना अपराध है। जांच में मशीन दूसरी निकली तो रकम वसूल होती है और अगली योजना भी बंद हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या ट्रैक्टर पर आधा दाम मिलता है?

पूरे ट्रैक्टर की बड़ी सब्सिडी हर साल हर किसान के लिए खुली नहीं होती। ज्यादातर खिड़कियां छोटे यंत्रों की होती हैं। जो विज्ञापन “ट्रैक्टर फ्री” कहे, उसे कृषि कार्यालय के नोटिस से मिलाएं।

अनुदान कितने प्रतिशत है?

केंद्र की कृषि यंत्र योजना और राज्य टॉप-अप मिलाकर छोटे किसानों, महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति को अक्सर ज्यादा प्रतिशत मिलता है। आम ढांचा 40 से 50 प्रतिशत के आसपास रहा है। हर मशीन की रुपए वाली सीमा अलग होती है।

मशीन पहले खरीद लें या अनुमति के बाद?

अनुमति और पोर्टल पर चयन के बाद ही खरीदें। पहले खरीदी मशीन बहुत बार अनुदान से बाहर हो जाती है। पैनल में दर्ज कंपनी ही लें।

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