एफपीओ यानी किसान उत्पादक संगठन: अकेले नहीं, मिलकर बेचने पर क्या मदद मिलती है

राजस्थान की महिला किसान सरकारी योजना की जानकारी पढ़ते हुए
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एक किसान की दस बोरी मूंग आढ़तिया सस्ते में उठा लेता है। पचास किसानों की पांच सौ बोरी पर बात दूसरी होती है। एफपीओ, यानी किसान उत्पादक संगठन, इसी हिसाब से बना है। किसान उसके शेयरधारक होते हैं। मुनाफा उनके हिस्से में लौटता है, अगर कारोबार चला तो।

केंद्र ने फरवरी 2020 में 10,000 नए एफपीओ बनाने की योजना खोली थी। साथ में हैंडहोल्डिंग, इक्विटी अनुदान और क्रेडिट गारंटी फंड रखा गया, ताकि बैंक समूह को कर्ज देते समय थोड़ा निश्चिंत रहे।

सदस्य को सीधे क्या नहीं मिलता

  • हर महीने नकद किस्त नहीं मिलती
  • सिर्फ फोटो खिंचवाने से शेयरधारक अमीर नहीं होता
  • अध्यक्ष अकेला खाता नहीं चला सकता। नियम में सामूहिक फैसला और ऑडिट होता है

सदस्य और संस्था को क्या मिल सकता है

  • बीज, खाद और दवाई की थोक खरीद, इसलिए दाम कम
  • ग्रेडिंग के बाद सीधा व्यापार या ई-नाम पर बिक्री
  • इक्विटी अनुदान: सदस्यों की शेयर पूंजी के मुकाबले संस्था को अतिरिक्त पैसा, दिशानिर्देश की सीमा तक
  • क्रेडिट गारंटी: बैंक कर्ज पर गारंटी कवर, ताकि कोलैटरल की कमी पूरे कर्ज को न रोक दे
  • पांच साल तक संचालन सिखाने वाली संस्था। अच्छी संस्था फर्क डालती है, कागज़ी संस्था सिर्फ मीटिंग करती है

गोदाम बनाना हो तो कृषि अवसंरचना कोष एफपीओ के नाम से भी खुलता है।

शुरू करने से पहले दस सवाल

  1. असली किसान सदस्य हैं या सिर्फ आधार की फोटोकॉपी?
  2. कौन सी एक फसल बेचेंगे? बीकानेर में मूंग, मोठ, ग्वार या मूंगफली में से एक चुनना आसान है। सब कुछ बेचने का वादा फेल होता है
  3. अध्यक्ष और सचिव का हिसाब कौन देखेगा?
  4. बैंक खाता संस्था के नाम है या किसी एक व्यक्ति के?
  5. हैंडहोल्डिंग संस्था का नाम लिखित समझौते में है या सिर्फ मौखिक?

कृषि विभाग, नाबार्ड और कुछ स्वयंसेवी संस्थाएं प्रमोटर बनती हैं। प्रमोटर का नाम पूछें। जो कहे “आप कुछ न करो, हम एफपीओ बना देंगे और आपको वेतन मिलेगा”, उसका कागज़ ज़िला कृषि कार्यालय में चेक करवाएं।

सच का एफपीओ धीमा होता है। पहला साल खरीद-बिक्री सीखने में जाता है। दूसरा साल भाव संभालने में। जो परिवार इस धैर्य के लिए तैयार हो, वही शेयर भरे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या एफपीओ में नाम लिखवाने पर हर सदस्य को किस्त मिलती है?

नहीं। यह पीएम किसान जैसी नकद योजना नहीं है। मदद संस्था को मिलती है: गठन, प्रशिक्षण, इक्विटी अनुदान और बैंक कर्ज की गारंटी। सदस्य को लाभ तब मिलता है जब संस्था सच में माल बेचे।

कम से कम कितने किसान चाहिए?

आमतौर पर छोटी जोत वाले इलाके में करीब 300 सदस्य और खास पहाड़ी या आदिवासी क्षेत्र में कम। राजस्थान के अपने ब्लॉक की सीमा क्लस्टर आधारित व्यवसाय संगठन या कृषि विभाग से पूछें। कागज़ पर झूठे नाम लिखवाना बाद में अपराध बनता है।

इक्विटी अनुदान क्या है?

सदस्य जो शेयर पूंजी जमा करते हैं, केंद्र उसके मुकाबले संस्था को अतिरिक्त पूंजी देता है, एक सीमा तक। यह तनख्वाह नहीं है। कारोबार में लगती है।

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